दांतों में खान पान के कण अटकना और दांतों का सड़ना, दांतों पर अत्यधिक मैल जमना, मुंह से दुर्गन्ध आना और मुंह में अरुचिकर स्वाद का निर्माण होना, जीवाणुओं का पसरण, मसूड़ों में जलन का एहसास होना और छालों का निर्माण होना, जरा सा छूने पर भी मसूड़ों से रक्तस्राव होना इत्यादि पायरिया के लक्षण होते हैं। लेकिन घबराइये नहीं क्‍योंकि इससे बचने में कुछ आयुर्वेदिक उपाय आपकी मदद कर सकते हैं।

सरसों का तेल और सेंधा नमक

यह पायरिया के उपचार के लिए एक बहुत ही प्रचलित औषधि है। सरसों के तेल में सेंधा नमक मिलाकर दांतों पर लगाने से दांतों से निकलती हुई दुर्गन्ध और रक्त बंद होकर दांत मजबूत होते हैं और पायरिया जड़ से निकल जाता है।

अरंडी का तेल

200 मिलीलीटर अरंडी का तेल, 5 ग्राम कपूर, और 100 मिलीलीटर शहद को अच्छी तरह मिला दें, और इस मिश्रण को एक कटोरी में रखकर उसमे नीम के दातुन को डूबोकर दांतों पर मलें और ऐसा कई दिनों तक करें। यह भी पायरिया को दूर करने के लिए एक उत्तम उपचार माना जाता है।

कच्‍चे अमरुद

अमरुद विटामिन सी का बहुत अच्छा स्रोत होने के कारण दांतों के लिए बहुत लाभकारी होता है। समस्‍या होने पर कच्चे अमरुद पर थोडा सा नमक लगाकर खाने से भी पायरिया के उपचार में सहायता मिलती है।

नीम की पत्तियां

नीम के पत्तों की राख में कोयले का चूरा और कपूर मिलाकर रोज रात को लगाकर सोने से पायरिया में लाभ होता है। इसके अलावा यह पाउडर मसूड़ों से रक्तस्राव और पस के निर्माण पर नियंत्रण रखता है, और मुंह से दुर्गन्ध हटाने में भी सहायता करता है। आप अपने दांतों में नीम के दातुन से ब्रश भी कर सकते हैं।

 
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