कोर्ट में इस बात को मानने का कारण यह है:

मौत की सजा मुकर्रर करने के बाद पेन की निब तोड़ देना एक प्रतीक है। इसका मतलब यह है कि एक जिस पेन से एक दफा किसी की मौत लिख दी हो, उसका इस्तेमाल दुबारा नहीं किया जाएगा।

मौत की सजा को अंतिम सजा माना जाता है। यह सजा उन्हीं मुकदमों में सुनाई जाती हैं, जिन्हें हद से ज्यादा खतरनाक और गंभीर माना जाता है और उनमें किसी और सजा से न्याय नहीं किया जा सकता।

इसके अलावा एक बार फैसला सुनाने और लिखने के बाद जजों को उसमें किसी भी तरह का फेरबदल करने का अधिकार नहीं होता। निब को इसलिए भी तोड़ा जाता है कि जज अपने फैसले को बदलने के बारे में न सोचें।

इस बार में एक पुरानी कहावत यह भी कहती है:

“सजा-ए-मौत दर्दनाक है, मगर पेन तोड़कर उसका दुख दिखाया जाना जरूरी है”

 

 

 

 
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